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राशिफल 2017 का बैक पेज

Posted by Vedic Astrology on December 23, 2016

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राशिफल 2017

Posted by Vedic Astrology on December 23, 2016

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मेष 2017
जनवरी 2017
प्रथम सप्ताह
अंग्रेजी कैलेण्डर के हिसाब से नव वर्ष का आगाज़ आपके लिए रुचिकर एवं प्रेरणादायी रहेगा। आपका राशि स्वामी मंगल लाभ भाव में विचरण कर रहा है, सप्ताह के आरम्भ में चन्द्र भी आपके कर्म भाव में ही है और सूर्य आपके भाग्य भाव में है जो महिलाओं, मित्रों और सरकार से लाभ मिलने का संकेत दे रहा है। जो मेष जातक सरकार से सम्बंधित काम करते हैं, उनको इस समय नए आर्डर मिलेंगे अथवा सरकारी लाभ प्राप्त होंगे। इस समय लंबित पड़े कार्य पूर्ण होने की संभावना है। सप्तमेश शुक्र भी लाभ भाव में है जो आपको पारिवारिक और दांपत्य सुख का भी संकेत दे रहा है। रिश्तेदारों से संचार-संवाद सम्बन्धी थोड़ी समस्या आ सकती है, लेकिन किसी भी ग़लतफ़हमी को समाप्त करना ही श्रेष्ठ रहेगा क्योंकि इस सप्ताह बुध वक्री रहेगा| शुभ विचार आएंगे और स्वयं की मेहनत से अपने भाग्य का निर्माण करने की इच्छा बलवती होगी। सुख और आनंद की भावना का अनुभव होगा। अच्छी वस्तु की प्राप्ति होगी। प्रियजनों के साथ उपहार आदि का लेनदेन होगा। सप्ताह का मध्य भाग आर्थिक मोर्चे पर कुल मिलाकर शुभ रहेगा। सप्ताह का अंतिम भाग शुभ है, जो आर्थिक लाभ करवाएगा। गुरु के छठे भाव में होने से शेयर बाज़ार, जुए सट्टे आदि से दूर रहना आपके लिए अच्छा रहेगा।
कार्य/व्यवसाय
आर्थिक मोर्चे पर आप को खास चिंता करने की जरूरत नहीं। सप्ताह के पहले दिन आप खुद के सौंदर्य और व्यक्तित्व विकास पर खर्च करेंगे। हालांकि, उसके बाद के दो दिन आपकी आय अच्छी रहेगी। 2 तारीख को अपराह्न के बाद वाणिज्य व व्यापार के लिए धन लगाएंगे।
प्रेम
आपका पंचम भाव जो आपके प्रेम भाव को दर्शाता है, इसका स्वामी सूर्य आपके भाग्य भाव में है जो शुभ संकेत दे रहे हैं लेकिन प्रेम संबंधों में आप को थोड़ा संभल कर चलना होगा क्योंकि राहू की पंचम भाव में उपस्थिति से दूसरे लोग आप के बीच क्लेश उत्पन्न करने का प्रयास कर सकते हैं। आपके आपसी प्यार और विश्वास की परीक्षा हो सकती है। नए रिश्ते की शुरूआत के लिए यह समय ठीक नहीं है। लम्बी-अवधि के संबंधों के इच्छुक जातक या तो कोई भी निर्णय खूब सोच-समझकर लें या विवाह का निर्णय अभी स्थगित कर दें।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य सम्बन्धी कोई समस्या नहीं होगी, आप की सेहत अच्छी रहने के कारण आप चुस्ती-फर्ती के साथ काम करेंगे, जिससे आप में आत्मविश्वास बढ़ेगा। जिन जातकों को उच्च रक्तचाप, विटामिन, कोलेस्ट्रोल सम्बन्धी समस्या है और दवाई ले रहे हैं, उन्हें थोडा सजग रहना चाहिए, क्योंकि गुरु आपके छठे भाव में है और छठे भाव का स्वामी बुध अभी वक्री है| नियमित योग, व्यायाम और मेडिटेशन करने के लिए शुभ समय है।
करियर/प्रतियोगिता
व्यावसायिक मोर्चे पर समय अच्छा होने से वित्तीय लेन-देन, फैशन डिजाइन, कला, शिक्षण संसथान, बैंकिंग, , संचार, बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी या सरकारी ठेके आदि से जुड़े हैं, उनके लिए खूब लाभदायी समय है। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जी जान से लगे रहें, सफलता मिलेगी| भाग्य का भी साथ आपको मिलेगा| उच्च अध्ययन के लिए जो विदेश जाना चाहते हैं, उन्हें इच्छित संस्थान में प्रवेश मिल जायेगा |
द्वितीय सप्ताह
सप्ताह की शुरुआत में यानि 8 ता० को चन्द्र आपकी राशि से ही भ्रमण कर रहा है, इसलिए शुरुआत शानदार होगी| पंचमेश सूर्यदेव आपके भाग्य भाव में बुध के साथ हैं जो 8 ता० को ही मार्गी हो रहा है| आपका दशमेश शनि अष्टम में गोचर कर रहे हैं, अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मधुर सम्बन्ध बनाये रखना आपके लिए अच्छा रहेगा| अन्यथा कार्यस्थल पर कुछ कानाफूसी हो सकती है, हालाँकि इससे आपको कोई नुकसान नहीं है| जो नई नौकरी की तलाश में हैं उन्हें सफलता मिलेगी| आपके कार्यस्थल में कुछ सकारात्मक परिवर्तन भी हो सकते हैं| व्यवसायी वर्ग प्रगति करेंगे| व्यवसायी मौजूदा क्षेत्र के अलावे किसी अलग कार्य की शुरूआत करेंगे, ऐसी संभावना बन रही है। किसी भी परिस्थिति में मूल व्यवसाय से धन निकालकर नए काम में ना लगायें| इस सप्ताह आपकी राशि कुल मिलाकर शुभ फलदायी रहेगी। सप्ताह की शुरूआत में थोडा खर्च पर नियंत्रण रखना होगा। इस समय गुस्से पर नियंत्रण रखें क्योंकि राशि स्वामी मंगल केतु के साथ ग्यारहवें भाव में है। व्यर्थ की भाग दौड़ भी रहेगी। हालांकि, इसके बाद का समय भाग्य में प्रगतिशील रहेगा। इस समय आप इस तरह की योजनाओं पर कार्य कर सकते हैं, जिनका आपको भविष्य में काफी लाभ होगा। इस समय कार्यक्षेत्र में छोटे-बड़े फेरबदल की संभावना है। आपके जीवन में आया हुआ परिवर्तन कदाचित अभी आपको पसंद न आए लेकिन भविष्य में आपके भाग्य के द्वार खोलने वाला सिद्ध होगा। आपकी प्रतिष्ठा और सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है।
कार्य/व्यवसाय
आर्थिक मोर्चे पर भाग्य का साथ मिलने से आप को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। इस हफ्ते धार्मिक कार्य में धन खर्च हो सकता है। आमदनी व खर्चे के संतुलन में सकारत्मक रुख रहेगा अर्थात आमदनी ज्यादा रहेगी, आपको किए गए काम से प्रतिफल मिलता रहेगा। आप को खुद के कामकाज का अपेक्षा से अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
प्रेम
आप विपरीत लिंगी जातकों के साथ संपर्क व संवाद पर विशेष जोर देंगे। काम के अत्यधिक व्यस्तता के कारण आप अपने प्रेमी को विभिन्न उपकरणों के मदद से अपने निकट होने का एहसास दिलाएंगे। पहले प्रेम संबंधों में थोड़ी नीरसता दिखाई देगी। पर, सप्ताह के अंत आते-आते जीवन में फिर से रस आ जाएगा।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य के प्रति सावधानी रखनी होगी। जिनको एसिडिटी, कैल्शियम की कमी इत्यादि की पीड़ा हो, उनको विशेष ख्याल रखना होगा। मध्य सप्ताह में आप का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और अपने सौन्दर्य निखार हेतु कोई उपचार भी करा सकते हैं। जिन जातकों को सर्दी व पेट सम्बन्धी तकलीफें हैं, उनको अपने आहार का खास ध्यान व शरीर को पर्याप्त विश्राम देना होगा।
करियर/प्रतियोगिता
सप्ताह के पहले दिन ही महत्वपूर्ण निर्णय ले लें, अवसर आपके पक्ष में है। व्यवसाय में विशेष रूप से सरकारी कार्य में लगे जातकों जैसे कि सरकारी कर्मचारियों या सरकारी ठेकेदारों के लिए खूब प्रगतिकारक समय है। पिता की आय में वृद्धि होगी, जो आप के वाणिज्य-व्यापार के लिए सहायक होगी। सप्ताह के अंत में आप नए उद्यम लगाने का विचार कर सकते हैं। छात्रों को सप्ताह के प्रथम दिवस विद्याध्ययन में एकाग्रता का अनुभव होगा। इसलिए आप तन्मयता के साथ ध्यान केन्द्रित कर लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे। प्पूरे सप्ताह आप पढ़ाई में आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करके कठिन विषयों को सरलता से समझने का प्रयास करेंगे।
तृतीय सप्ताह
इस सप्ताह सूर्य राशि बदल कर मकर राशि में प्रवेश कर गया है, जो आपके लिए पेशेवर सफलता का नया कीर्तिमान बना सकता है| यदि आप सेवा क्षेत्र में हैं तो आपको पदोन्नति मिल सकती है| कोई प्रशस्ति या मान-सम्मान मिलने की प्रचुर सम्भावना है| यह समय आपके लिए शुभ रहेगा। व्यवसाय और आर्थिक प्रगति, धंधे में लाभ और अचानक धन लाभ या वसीयत-वारिसदारी से कोई लाभ मिलेगा। सरकारी टेंडर, ठेके आदि से जुड़े हैं तो आपको शुभ समाचार इस सप्ताह मिल सकता है| सप्ताह की शुरुआत में आत्मविश्वास से काम लेना होगा क्योंकि आपका चन्द्र राहू के साथ पंचम भाव में है| पिता के साथ संबंधों में थोडा तनाव हो सकता है, इससे बचें, आपका नवमेश गुरु छठे भाव में है| वैसे तो एकादश भाव जागृत है इसलिए आपको हर प्रकार से लाभ, उधारी, आमदनी और मित्रों एवं बड़ों से लाभ करवाएगा। 17 एवं 18 जनवरी को अप्रत्याशित खर्च होने की संभावना है और अनावश्यक या बेकार की दौड़ धूप में खूब व्यस्त रहेंगे। जीवन साथी के साथ संबंधों में भी मधुरता बनी रहेगी। इस समय स्वास्थ्य परेशान कर सकता है एवं आपको धन खर्च करना पड़ सकता है। हालांकि, इस समय आपको उपयुक्त उपचार नहीं मिलेगा, जिसके कारण स्वास्थ्य में अधिक सुधार महसूस नहीं करेंगे। सप्ताहांत आप अनंद और मौज मस्ती में व्यतीत करेंगे।
….इसी तरह सारे राशियों के सप्ताहवार विवरण दिए गए हैं साथ ही कई अन्य उपयोगी जानकारियां दी गयी हैं….

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राशिफल 2016 Rashiphal 2016

Posted by Vedic Astrology on January 15, 2016

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द्वितीय संस्करण का प्राक्कथन
प्रथम संस्करण की शानदार सफलता से मैं अभिभूत हूँ. दो-दो महीने के अंतराल में इसे दो बार पुनर्मुद्रण कराना पड़ा. फिर भी कई शहरों से बार-बार राशिफल 2015 की आपूर्ति के अनुरोध आते ही रहे जिसे हमारे प्रकाशक पूरा ना कर सके. इसके दो कारण हैं, एक तो हमारा यह प्रथम प्रयास था और हमें ये आशा ना थी कि लोकप्रियता इतनी अधिक हो जाएगी कि दो बार रिप्रिंट कराने पर भी हम आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पाएंगे और दूसरे हर प्रकाशन की अपनी कार्य-योजना होती है, जिसे वे कम से कम अव्यवस्थित करना चाहते हैं. इस कारण हर पुस्तक की मुद्रण व्यवस्था अपने समयानुसार होती है.
मुझे प्रसन्नता है कि सैकड़ों पाठकों ने पत्र, ईमेल और फेसबुक के माध्यम से अपने विचार, सुझाव, जिज्ञासा और शिकायत रखी. अधिकांश पाठकों ने हर सप्ताह की विस्तृत जानकारी देने का निवेदन किया है, जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए साप्ताहिक राशिफल को सिर्फ बढाया ही नहीं गया है, बल्कि इस संस्करण में कई जिज्ञासाओं को अलग से शीर्षक देकर जोड़ दिया गया है. अब प्रति सप्ताह सामान्य संकेतों के अतिरिक्त, कार्य/व्यवसाय, प्रेम, स्वास्थ्य और करियर/ प्रतियोगिता शीर्षक से अतिरिक्त सामग्री आपको मिलेगी. इसके अतिरिक्त प्रत्येक राशि के सामान्य परिचय, गुण-दोष एवं अन्य विशेषताओं को नए सिरे से दुबारा लिखा गया है. 2016 के पर्व-त्योहारों की विस्तृत सूची दी गयी है. इसके अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण पठनीय सामग्री दी गई है, जिससे हमारे पाठकगण निश्चित रूप से लाभान्वित होंगे.
इस संस्करण को नए सिरे से तैयार करने में पाठकों के विचारों से बड़ी सहायता मिली है. मेरे छात्रों और सहयोगियों के सुझावों और परिश्रम से ही इसे नए कलेवर में प्रस्तुत कर पाना संभव हुआ है.
यूँ तो हम हर वर्ष का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि नया वर्ष पिछले वर्ष से उत्तम हो. ऐसा हो सकता है- अथक पुरुषार्थ और समर्थ मार्गदर्शन से. शांख्यायन, बौधायन, नारद, अंगिरा, बृहस्पति और आप्स्ताम्भ, इन सभी सूत्रकारों ने अवसर का लाभ पुरुषार्थ चतुष्टय यानी अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रयास करने का निर्देश दिया है. सफलता के शिखर पर वही पहुँचते हैं जिन्हें पारिवारिक, सामाजिक और पेशेवर जिंदगी में सामंजस्य की कला आती हो. राशिफल 2016 आपको पल-पल मार्गदर्शन देता है, ताकि आपकी उर्जा का शत प्रतिशत रूपान्तरण सकारात्मक परिणाम में हो सके.
जिंदगी की हर सुबह हमारे लिए एक सच्चे मित्र की तरह नयी-नयी संभावनाओं को लेकर आता है और प्रकृति चाहती है कि हम इस अभिनव उपहार को ग्रहण कर शुभ दिन का श्रृंगार करें. लेकिन जब हम अनमने ढंग से दिन की शुरुआत करते हैं तो वह अक्षय उर्जा निराश होकर वापस चली जाती है और दुसरे दिन ना तो उस उर्जा में कोई उत्साह रहता है और ना ही उसके उपहारों में वह सौन्दर्य. यह बात वैज्ञानिक रूप से साबित भी हो चुकी है और ‘आकर्षण के सिद्धांत’ से मिलती-जुलती है. सौभाग्य का सृजन करना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है. जब हमारे पास प्राचीन ऋषि-मुनियों के अनुभवों की अपार निधि विद्यमान है तो क्यों न सौभाग्य के सृजन का उपाय खोजा जाय ? राशिफल 2016 के मार्गदर्शन की सहायता से सुखी, सम्पन्न, निरोग और आनन्दमय जीवन जिया जा सकता है और पथ में आने वाली चट्टानों जैसी बाधाओं से मुक्ति पाई जा सकती है।

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नववर्ष 2016 आपके लिए नयी उम्मीदें, नए जोश, नयी सफलता और नए कीर्तिमान ले कर आए, ऐसी प्रभु से प्रार्थना करता हूँ. याद रखें, मानव जीवन विधाता का श्रेष्ठतम उपहार है और हर पल आगे बढ़ना हमारा कर्तव्य भी है और दायित्व भी.
आर के श्रीधर

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नोट: राशिफल 2016 पाने के लिए या इस सम्बन्ध में किसी भी प्रकार की जिज्ञासा के लिए संपर्क करें ईमेल: rkshridhar25@gmail.com

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आंवला नवमी: सौभाग्य और मेधावी संतान के लिए

Posted by Vedic Astrology on November 17, 2015

तिथि: 20 नवम्बर
—-आर के श्रीधर

आंवला नवमी, कार्तिक मास की शुंक्ल पक्ष की नवमी को ”आंवला नवमी“ कहते हैं। इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा की जाती है तथा रात्रि भोजन आंवला वृक्ष के नीचे ही करना चाहिए जिससे अखंड सौभाग्य, आरोग्य, संतान व सुख की प्राप्ति होती है। अक्षय नवमी का शास्त्रों में वही महत्व बताया गया है जो वैशाख मास की तृतीया का है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा किया जाता है उनका पुण्य कई-कई जन्म तक प्राप्त होता है। इसी प्रकार इस दिन कोई भी शास्त्र विरूद्घ काम किया जाए तो उसका दंड भी कई जन्मों तक भुगतना पड़ता है इसलिए अक्षय नवमी के दिन ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे किसी को कष्ट पहुंचे।
शास्त्रों में बताया गया है कि भोजन के समय थाली में आंवले का पत्ता गिरे तो यह बहुत ही शुभ होता है। थाली में आंवले का पत्ता गिरने से यह माना जाता है कि आने वाले साल में व्यक्ति की सेहत अच्छी रहेगी।
इस दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। कहा जाता है कि आज ही विष्णु भगवान ने कुष्माण्डक दैत्य को मारा था और उसके रोम से कुष्माण्ड की बेल हुई। इसी कारण कुष्माण्ड का दान करने से उत्तम फल मिलता है। इसमें गन्ध, पुष्प और अक्षतों से कुष्माण्ड का पूजन करना चाहिये। विधि विधान से तुलसी का विवाह कराने से कन्यादान तुल्य फल मिलता है।
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प्रचलित कथा
काशी नगर में एक निःसन्तान धर्मात्मा तथा दानी वैश्य रहता था। एक दिन वैश्य की पत्नी से एक पड़ोसन बोली यदि तुम किसी पराये बच्चे की बलि भैरव के नाम से चढ़ा दो तो तुम्हे पुत्र प्राप्त होगा। यह बात जब वैश्य को पता चली तो उसने अस्वीकार कर दिया। परन्तु उसकी पत्नी मौके की तलाश मे लगी रही। एक दिन एक कन्या को उसने कुएं में गिराकर भैरो देवता के नाम पर बलि दे दी। इस हत्या का परिणाम विपरीत हुआ। लाभ की जगह उसके पूरे बदन में कोढ़ हो गया तथा लड़की की प्रेतात्मा उसे सताने लगी। वैश्य के पूछने पर उसकी पत्नी ने सारी बात बता दी। इस पर वैश्य कहने लगा गौवध, ब्राह्मण वध तथा बाल वध करने वाले के लिए इस संसार मे कहीं जगह नहीं है, इसलिए तू गंगातट पर जाकर भगवान का भजन कर तथा गंगा में स्नान कर तभी तू इस कष्ट से छुटकारा पा सकती है।
वैश्य पत्नी गंगा किनारे रहने लगी। कुछ दिन बाद गंगा माता वृद्धा का वेष धारण कर उसके पास आयी और बोली तू मथुरा जाकर कार्तिक नवमी का व्रत तथा आंवला वृक्ष की परिक्रमा कर तथा उसका पूजन कर। यह व्रत करने से तेरा यह कोढ़ दूर हो जाएगा। वृद्धा की बात मानकर वैश्य पत्नी अपने पति से आज्ञा लेकर मथुरा जाकर विधिपूर्वक आंवला का व्रत करने लगी। ऐसा करने से वह भगवान की कृपा से दिव्य शरीर वाली हो गई तथा उसे पुत्र प्राप्ति भी हुई।
विष्णु का स्वरूप है आंवला
शास्त्रों के अनुसार आंवला, पीपल, वटवृक्ष, शमी, आम और कदम्ब के वृक्षों को चारों पुरुषार्थ दिलाने वाला कहा गया है। इनके समीप जप-तप पूजा-पाठ करने से प्रारब्ध के सभी पाप मिट जाते हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार पूर्वकाल में जब समस्त संसार समुद्र में डूब गया था तो जगतपिता ब्रह्मा जी के मन में सृष्टि उत्पन्न करने का विचार आया। वे एकाग्रचित होकर ‘ऊं नमो नारायणाय’ का उपांशु जप करने लगे। वर्षों बाद जब भगवान विष्णु उन्हें दर्शन-वरदान देने हेतु प्रकट हुए और इस कठिन तपस्या का कारण पूछा तो ब्रह्मा जी ने कहा- ‘हे! जगतगुरु मैं पुन: सृष्टि आरम्भ करना चाहता हूं। आप मेरी सहायता करें।’ तब विष्णु जी कहा- ‘ब्रह्मादेव! आप चिंता न करें।’ विष्णु जी के दिव्य दर्शन एवं आश्वासन से ब्रह्मा जी भावविभोर हो उठे। उनकी आंखों से भक्ति-प्रेम वश आंसू बह कर नारायण के चरणों पर गिर पड़े, जो तत्काल वृक्ष के रूप में परिणत हो गए। ब्रह्मा जी के आंसू और विष्णु जी के चरण के स्पर्श मात्र से वह वृक्ष अमृतमय हो गया। विष्णु जी उसे धात्री (जन्म के बाद पालन करने वाली दूसरी मां) नाम से अलंकृत किया। सृष्टि सृजन के क्रम में सबसे पहले इसी ‘धात्रीवृक्ष’ की उत्पत्ति हुई। सब वृक्षों में प्रथम उत्पन्न होने के कारण ही इसे ‘आदिरोह’ भी कहा गया है। विष्णु जी ने ब्रह्मा जी को वरदान दिया- ‘ सृष्टि सृजन के क्रम में यह धात्री वृक्ष आप की मदद करेगा। जो जीवात्मा इसके फल का नियमित सेवन करेगी, वह त्रिदोषों- वात, पित्त एवं कफ जन्य रोगों से मुक्त रहेगी। कार्तिक नवमी को जो भी जीव धात्री वृक्ष का पूजन करेगा, उसे विष्णु लोक प्राप्त होगा।’ तभी से इस तिथि को धात्री नवमी या आंवला नवमी के रूप में मनाया जाता है। पद्म पुराण में भगवान शिव ने कार्तिकेय से कहा है ‘आंवला वृक्ष साक्षात् विष्णु का ही स्वरूप है। यह विष्णु प्रिय है और इसके स्मरण मात्र से गोदान के बराबर फल मिलता है।’
माता लक्ष्मी से सम्बन्ध
धात्री के वृक्ष की पूजा एवं इसके वृक्ष के नीचे भोजन करने की प्रथा की शुरूआत करने वाली माता लक्ष्मी मानी जाती हैं। इस संदर्भ में कथा है कि एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी भ्रमण करने आयीं। रास्ते में भगवान विष्णु एवं शिव की पूजा एक साथ करने की इच्छा हुई। लक्ष्मी मां ने विचार किया कि एक साथ विष्णु एवं शिव की पूजा कैसे हो सकती है। तभी उन्हें ख्याल आया कि तुलसी एवं बेल का गुण एक साथ आंवले में पाया जाता है। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेल शिव को।
आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले की वृक्ष की पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए। लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन करवाया। इसके बाद स्वयं भोजन किया। जिस दिन यह घटना हुई थी उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि थी। इसी समय से यह परंपरा चली आ रही है।
अक्षय नवमी के दिन अगर आंवले की पूजा करना और आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन बनाना और खाना संभव नहीं हो तो इस दिन आंवला जरूर खाना चाहिए। चरक संहिता के अनुसार अक्षय नवमी को आंवला खाने से महर्षि च्यवन को फिर से जवानी यानी नवयौवन प्राप्त हुआ था।
अक्षय नवमी की पूजन विधि-
प्रात:काल स्नान कर आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है| पूजा करने के लिए आँवले के वृक्ष की पूर्व दिशा की ओर उन्मुख होकर षोडशोपचार पूजन करें| दाहिने हाथ में जल, चावल, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प करें|
अद्येत्यादि अमुकगोत्रोमुक (गोत्र का उच्चारण करें) ममाखिलपापक्षयपूर्वकधर्मार्थकाममोक्षसिद्धिद्वारा श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं धात्रीमूले विष्णुपूजनं धात्रीपूजनं च करिष्ये।
ऐसा संकल्प कर आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके ऊँ धात्र्यै नम: मंत्र से आह्वानादि षोडशोपचार पूजन करके निम्नलिखित मंत्रों से आंवले के वृक्ष की जड़ में दूध की धारा गिराते हुए पितरों का तर्पण करें-

पिता पितामहाश्चान्ये अपुत्रा ये च गोत्रिण:।
ते पिबन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेक्षयं पय:।।
आब्रह्मस्तम्बपर्यन्तं देवर्षिपितृमानवा:।
ते पिवन्तु मया दत्तं धात्रीमूलेक्षयं पय:।।
इसके बाद आंवले के वृक्ष के तने में निम्न मंत्र से कच्चे सूत्र लपेटें-
दामोदरनिवासायै धात्र्यै देव्यै नमो नम:।
सूत्रेणानेन बध्नामि धात्रि देवि नमोस्तु ते।।
इसके बाद कर्पूर या घृतपूर्ण दीप से आंवले के वृक्ष की आरती करें तथा निम्न मंत्र से उसकी प्रदक्षिणा करें –
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे।।
आंवले के वृक्ष के नीचे ब्राह्मण भोजन भी कराना चाहिए और अन्त में स्वयं भी आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन करना चाहिए। एक पका हुआ कुष्मांडा या कुम्हड़ा (कद्दू) लेकर उसके अंदर रत्न, सुवर्ण, रजत या रुपया आदि रखकर निम्न संकल्प करें-
ममाखिलपापक्षयपूर्वक सुख सौभाग्यादीनामुक्तरोत्तराभिवृद्धये कूष्माण्डदानमहं करिष्ये।
तदनन्तर ब्राह्मण को तिलक करके दक्षिणा सहित कुम्हड़ा दे दें और निम्न प्रार्थना करें-
कूष्णाण्डं बहुबीजाढयं ब्रह्णा निर्मितं पुरा।
दास्यामि विष्णवे तुभ्यं पितृणां तारणाय च।।
पितरों के शीतनिवारण के लिए यथाशक्ति कंबल आदि ऊनी वस्त्र भी ब्राह्मण को देना चाहिए। अगर घर में आंवले का वृक्ष न हो तो किसी बगीचे में या गमले में आंवले का पौधा लगा कर यह कार्य सम्पन्न करना चाहिए| इसे कुष्मांडा नवमी भी कहते हैं|

आंवला नवमी को किस राशि के लोग क्या करें और क्या ना करें

मेष
क्या करें- ब्राह्मण को घर बुलाकर सम्मान करें।
क्या न करें- भाग दौड़ अधिक नहीं करें।
वृषभ
क्या करें- भैरव आराधना करें।
क्या न करें- निवेश से बचें।
मिथुन
क्या करें- ॐ श्री सूर्याय नम: का जाप करें।
क्या न करें- यात्रा नहीं करें।
कर्क
क्या करें- लाल पुष्प का पौधा लगायें।
क्या न करें- परिजनों के विवाद से बचें।
सिंह
क्या करें- शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति को दान दें।
क्या न करें- मांसाहार का सेवन नहीं करें।
कन्या
क्या करें- गरीब को भोजन करायें।
क्या न करें- मानसिक दबाव अधिक लेने से बचें।
तुला
क्या करें- श्री शिवचालीसा का पाठ करें।
क्या न करें- गलत संगत में समय नहीं गवाएं।
वृश्चिक
क्या करें- सरसों तेल, उड़द का दान करें।
क्या न करें- बड़ों का उपहास नहीं करें।
धनु
क्या करें- मस्तक पर तिलक धारण करें।
क्या न करें- अपनी वाणी पर संयम रखें।
मकर
क्या करें- ॐ शुं शुक्राय नम:का जाप करें।
क्या न करें- परिवार की अनदेखी नहीं करें।
कुम्भ
क्या करें- रजत आभूषण धारण करें।
क्या न करें- बच्चों पर क्रोध नहीं करें।
मीन
क्या करें- ॐ वृ वृहस्पतये नम: का जाप करें।
क्या न करें- जल्दी धन लाभ के लिए किसी को धोखा नहीं दें।

आंवले का ग्रहों से सम्बन्ध

ज्योतिष में बुध ग्रह की पीड़ा शान्ति कराने के लिये आंवले के प्रयोग के साथ स्नान कराया जाता है। जिस व्यक्ति का बुध ग्रह पीडि़त हो उसे शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार को स्नान जल में- आंवला, शहद, गोरोचन, स्वर्ण, हरड़, बहेड़ा, गोमय (गोबर) एंव अक्षत डालकर निरन्तर 15 बुधवार तक स्नान करना चाहिए जिससे उस जातक का बुध ग्रह शुभ फल देने लगता है। इन सभी चीजों को एक कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। उपरोक्त सामग्री की मात्रा दो-दो चम्मच पर्याप्त है। पोटली को स्नान करने वाले जल में 10 मिनट के लिये रखें। एक पोटली 7 दिनों तक प्रयोग कर सकते है।

जिन जातकों का शुक्र ग्रह पीडि़त होकर उन्हे अशुभ फल दे रहा है। वे लोग शुक्र के अशुभ फल से बचाव हेतु शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को हरड़, इलायची, बहेड़ा, आंवला, केसर और एक सफेद फूल युक्त जल से स्नान करें तो लाभ मिलेगा। इन सभी पदार्थों को एक कपड़े में बाधकर पोटली बना लें। उपरोक्त सामग्री की मात्रा दो-दो चम्मच पर्याप्त रहेगी। पोटली को स्नान के जल में 10 मिनट के लिये रखें। एक पोटली को एक सप्ताह तक प्रयोग में ला सकते है।

आंवला और वास्तु

आंवले का वृक्ष घर में लगाना वास्तु की दृष्टि से शुभ माना जाता है। पूर्व की दिशा में बड़े वृक्षों को नहीं लगाना चाहिए परन्तु आंवले को इस दिशा में लगाने से सकारात्मक उर्जा का प्रवाह होता है। इस वृक्ष को घर की उत्तर दिशा में भी लगाया जा सकता है। जिन बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता है या फिर स्मरण शक्ति कमजोर है, उनकी पढ़ने वाली पुस्तकों में आंवले व इमली की हरी पत्तियों को पीले कपड़े में बांधकर रख दें।

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Jupiter Transits Cancer- 19.06.2014!

Posted by Vedic Astrology on December 17, 2014

Transit of Planets or simply Gochara in Vedic Astrology is one of the most fascinating instruments used by the astrologers to time an event. Then, it is obvious that the transit effects of slow moving planets like Jupiter are going to be much more profound than those of a fast moving planet. Jupiter takes about one year to transit each house and the study is done from the janma rashi or the position of the Moon in ones natal chart.

Jupiter will move from the sign of Gemini to the sign of Cancer on 19th June 2014. Cancer is the sign where Jupiter gets exalted and has its best powers. This transit is special as Jupiter gets exalted in Cancer. Jupiter in Cancer will be a great boon for the following Rashi people:

1. Gemini Rashi – Jupiter will be in the 2nd
2. Virgo Rashi – Jupiter will be in the 11th
3. Scorpio Rashi – Jupiter will be in the 9th
4. Capricorn Rashi – Jupiter will be in the 7th

Aries

Planet Jupiter is in 3rd house till 18th June 2014 and then it will move to 4th house. You may feel many challenges during the first half of the year as many obstructions and stress is likely to breed at your workplace and household. If you have any planning of change, you may defer it. Arguments must be avoided as it may lead to misunderstanding and confusion.

Second half of the year is favorable transit for the working professionals as the chances of support and increment in salary shall be prominent for them. There may be growth in fixed and movable property- you may buy a house or land and vehicle. On home front you will feel joyous boost.

Taurus

Planet Jupiter is in 2nd house till 18th June 2014 and then it will move to 3rd house. Jupiter in 2nd house gives auspicious results plus Saturn and Rahu in 6th house is a favourable placement. Majority of your problems will be solved.

This is a favourable period and you can expect the good results. For workers, there is development/promotion in career. Income will rise. Jobless people will get good job. For business people, expansion of business is possible. Profits will increase. You can buy new vehicle or invest in properties. This is the time for best investment of your money in fixed assets.
Students will get success in higher studies. Success requires hard work and people who are willing to do it are Taurus.

As the year progresses family and friends will play a more important role in your life. Your focus will shift to maintaining a healthy social life by getting more involvement in group activities and to enhance your social network.

Some of you might even find love opportunities in foreign land, with outcaste people and even in educational institutes. A few might be expanding their horizons brings them closer and involve themselves to online dating ping from a person who’s not the usual type…and thus begins a really new chapter in love. Long-distance romance prospects get exponentially higher through travel and cross-cultural connections during the second half of the year.

Gemini

Jupiter is in your Moon lagna hence it is bound to give your personality a new dimension. Problems will be solved and also your loan will be repaid. There might be a good job offer hence temptation for change is likely. Those who are in right biological age may be blessed with a child. It is a good time for students. I would point it out to you that you should be little alert and real effort is required to keep relationship area intact. Meaningless argument and anger is to be avoided.

The second half of the year will bring prosperity and wealth. Chances of getting inherited property and land property transaction might be quite rewarding. It is a very good time for planning and conceiving a big project. Your concentration will bring good results.

Cancer

Till 18th June 2014 planet Jupiter is in 12th house and after that it will be in your Rashi. It will be a testing time for you. If possible, avoid any new venture right now; alternatively do your all paper works meticulously. During this year don’t get indulged in taking financial risk. Keep an eye on your expenditure on renovation, vehicle etc. Don’t try to change a job, unless you have a certain job offer beforehand.

You should value your true love. It would be absolutely proper to avoid any indulgence in serious love affairs. Though luck will favour you, concentrate on professional growth and integrity instead of involving in emotional issues.

The second half of the year brings good fortune. You can expect happiness and full of activity on the home and family front. If you will concentrate all your positive energies and shall focus on this area, you will definitely find the necessary determination to overcome any challenges that may come to you.

Leo

This year you must be enthusiastic about your career in order to get extra ordinary success. You will show tremendous strength if any rough weather comes in your job front. This year is a year of success or you, as you will not only dream but act to fulfill that dream. Leos always have a positive attitude and plenty of confidence.

Don’t be selfish if it comes to love and relationship. You love your partner passionately despite many a flaws. You should stay away from confrontation and illogical arguments with your loved ones. You may refurnish home to make it appear more attractive, and will not shy away from entertainments and celebrations at home. Socializing, friends and relatives visiting your home and some fun activities – are all possibilities during the second half of the year.

Virgo

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 10th house and afterwards in 11th house. Professional growth will be little slow. Do not argue with your colleagues or with your boss. Business will show healthy sign. Please avoid any new business plans or expansions. Do not take risks at this period.

If you are constructing your house, that will be completed. Do not give loans or surety for others. Cash flow will be all right. Redundant expenses should be avoided until and unless mandatory. You should be very careful in buying assets. Get checked with lawyer, all the necessary documents before taking any steps.

You will be lucky enough to get the kind support of your near and dear in reaching your goals. You will spend quality time and bring more intimacy in your personal life. The transit of Jupiter on your social network zone brings important changes in your love and social life. Child birth is expected from married couple.

The right kind of communication and talk will be favorable to gaining favors. You might also see money coming from some of the passive sources of income from the property and past investments.

Libra

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 9th house after that in 10th house. The transit of planet Jupiter will ease some of your problems. Money flow will be normal. Better relationships with your family and friends.

Good time for those in jobs. Chances of promotions and increments are likely. Enhancement in business, buying luxury goods and foreign travels are expected. Unemployed persons will find jobs. Health should be taken care of. You have to control your expenses on useless things.

You will have an easygoing and progressive attitude in domestic and professional life. Personal power and independence will increase and you will do what pleases you most and you will do it in your way.

Planetary favour is instrumental in whatever you wish to do. You may attain zenith in your career growth. Change of employer is also likely, particularly foreign company may be your new destination. However, make your schedule and complete your work accordingly. Remaining calm even in odd situations is your best asset. Your polite dealing will pacify everything.

Scorpio

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 8th house and then moves into 9th house for rest of the year.

It is generally regarded as unfavourable position to your rashi. Moreover, you are running with Sade sati (7 ½ yrs of cycle). Saturn is placed in 12th house to your rashi.

You will face obstructions in your career and business. Do not argue with your boss and colleagues. Business development plans if any, should be deferred to next year. Mental tensions will be there. Expenses will be more than income. So, you should use your money very carefully. Do not buy new properties or vehicles at this time. You can be pulled into litigation if you are not careful. Health checks should be taken on time. Do not support any one illegally doing anything. If you recite Durga Shaptashati for mitigation of your problem, it will be helpful.

You are advised to focus on the positive aspects of your relationship, rather than dwelling on the negative. Avoid discussing major issues and be specific while communicating with a loving partner. Think before saying anything, especially while communicating with the beloved ones as misunderstanding is very likely and could end in dispute. The second half of the years brings vitality in your love life. There is a good chance to create more harmony with family members and loved ones. Domestic life will be far happier than before, and there is a likelihood of some events of celebrations and marriage ceremonies in close family circle.

Sagittarius

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 7th house and afterwards moves into 8th house. This period will bring career growth, business development and good cash flow. Jobless persons will get new jobs. Employed persons will get promotions with good increments. Your work will be respected and valued. Businessmen will feel happy with their sturdy business growth. New business plans will yield good results. Profits will increase. You can repay your old debts, if any.

Promising functions like marriage, child birth or happiness through children will give you more happiness. You will have monetary gains, pilgrimages, affluence and win over litigation. Health will be good. Saving your money and buying properties at this time is recommended. You should put maximum efforts to reap the benefits fully at this favourable period.

The second half of the year brings mixed effects on your family relationships. There may be a small dispute with your love partner but you will have to handle the situation by acting more mature and calming them down. You may be in conflict with one of the family members, and here you will have to be patient and strike a compromise. .

Capricorn

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 6th house and after that it assumes 7th house from your Rashi.

The position of Jupiter in the 6th house is not favourable for your rashi. It may give more everyday expenditure. Mental worry will prevail. In career or business, as the other planets are positive, you will continue to maintain and nurture amidst financial pressures. Do not take risks at this time. Decisions regarding your business deals should be taken with utmost care. Businessmen should be careful while investing in new ventures.

Students need to concentrate more as there could be derailment from education. Auspicious celebrations like marriage will give you happiness. Income and expenses will be equal.

Prayers to Lord Hanuman will give you the energy to face these challenging situations.

Capricorns will have to work hard to get what they want and give the work their priority. You must not take any shortcut to get your work done. Financially, you will be prosperous. There will be job changes in store for some. These can be within the same organization or with a different one.

There will be greater cooperation between you and your love partner. And those who are married will have unconditional attachment to their spouse during this year. Those who are single they might find love opportunities at work. You should remember not to take any important decision in love unless you gain more clarity. Make sure, do some research, gather facts and then move on with the plan systematically. You should avoid making any hasty decisions which have no long term potential or you may have to regret later.

Aquarius

Till 18th June 2014 Planet Jupiter is in 5th house and then it moves to 6th house from your janma rashi.

Things will work according to your planning. You will get rid off all your problems. This period gives good career, business success, good income, good health, foreign travel and higher status. Financial flow and celebrations in family will make you cheerful. Functions like marriage, child birth or happiness through children will give you more happiness. Job seekers will get good jobs. Employed persons will get promotions with good increments. Your work will be appreciated and valued.

Family must be your important priority. Loved ones may suffer mood swings but you will have to keep your temper in control and handle the situation with maturity. This might be challenging but you will have to be patient and deals such issues in a gentle manner. You can help improve the situation by sorting out the differences.

Pisces

Till 18th June 2014 Planet Jupiter in 4th house and then it moves to 5th house from your janma rashi.

Your plight will be decreased to some extent. You will be relaxed and happy at this stage. Since, Saturn is in the 8th house i.e. Ashtama Sani, you may not be completely relieved from negative effects. Do not expect much. Do not buy properties at this time. You should concentrate on your children’s studies. Expenses will be increased. Family life will be affected. There will be small growth in your career and in Business. Cash flow will be optimum.

Your financial conditions will get better day by day and you will meet success in almost all your monetary dealings. The second half of the year will be favorable for family and children. Unmarried Pisces will fall in love and have a lasting relationship with their loved ones.

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Gifts: An Astrological Exegesis

Posted by Vedic Astrology on February 24, 2013

R.K. Shridhar

Rotes Geschenk
Exchange of gifts has been a normal phenomenon among the human beings from time immemorial. In ancient times, our rishis and munis were fully aware of the significance of the day-to-day activities of men and women and the way it could affect the entire balance of one’s life. Thus, even the giving of gifts can be determined by taking into consideration the planetary influences.
In the present day context, a planetary consideration on gifts can take on a priority over making a choice. At present exchange of gifts in the society, specifically in India, is becoming an essential part of our relationship with others. There are occasions like marriage, birth days, festivals, housewarming etc., What makes the process very complicated is making a choice of a proper gift.
There is an infinite variety of things available in the market. One can choose a gift of any color or of any price. In each category of gifts there are innumerable aspects. The general gifts include: furniture, cosmetics, clothes, sweets, jewellery, stationery items, electronic items and even property. Sometimes even flowers suffice. Giving of a gift depends on our relationship with the person who we are giving a gift to.
Giving of cosmetics like perfumes and fragrances is becoming quite popular today. Maybe, it is because of their easy accessibility and wide price range. The dominant planet related to a gift of cosmetics is Venus. In fact, this planet is related to luxury and erotic impulses. Such items are very proper between lovers. However, at times a gift of such items may even activate the negative forces. Rahu and Venus play a role in some cosmetic items. For example some soaps and perfumes may have the essence of sandal and that attracts snakes. Not only this but also some cosmetic items may be a source of skin problems and might activate the dormant allergies. A little awareness about that would go a long way.
Garments of different variety are given frequently as gifts. The stitched articles like shirts, trousers and many more things represent Rahu and Ketu. So, while making a gift of garments, one should take into consideration the color and the possible effects of the one upon the person receiving a gift. But a gift of a cloth piece is safe as it is influenced by the Sun and Jupiter. Some soft silk items are governed by Venus and Moon. Khadi is rough but it symbolizes energy and enthusiasm as it is governed by the Sun.
However, garments and clothes can be given as gifts without their any possible effects upon the native – like son, daughter, wife and son-in-law.
A gift of dry fruits is becoming very popular in India today. Also fruits are given as gifts. These gifts represent mainly the Sun and, therefore, conducive to health of the native. Above all, these gifts are consumed within a limited period and get absorbed into the body.
Sweets and confectionery items are governed by Jupiter. There in no harm in giving such items to our friends and loved ones. However, these items are dominated by Jupiter, so, these may promote corpulence in the subject.
Electronic and electrical goods represent kitchen, bathroom and the whole house hold. Not only these but also some electronic items form a part of everyday existence. Mars and the Sun play a major role in some kitchen items related to fire and heat generation. A neat and clean kitchen with glowing gadgets is full of Apollonian and Martian characteristics and is a symbol of energy and vitality.
A gift of car represents the influence of Venus and is a symbol of good economic condition. Such a gift adds to the beauty of life. The gift of various forms of drinks and liquors are influenced by Venus and by the Sun and if, thoughtfully given, add to the life style immensely. It is associated with royalty.
Kitchen utensils mainly use metal and the influence of Saturn is most predominant when they are made of iron and like metals. However the utensils made of bone china and some other modern, synthetic articles have the influence of the Moon and Venus. Silver and gold utensils suggest opulence.
Furniture made of wood suggest the influence of Jupiter but the furniture made of iron suggest the influence of Saturn. The choice furniture as a gift to someone must be done with consideration.
Gems and silver and gold jewellery suggest immense prosperity and gifts of these may enhance the quality of the life of the receiver a lot. However, in making a gift of gems, the native’s planetary positions should not be overlooked. This is more important when you are planning to make a gift of diamond or sapphire to someone.
A gift of books and stationery items is always auspicious. Since these articles are governed by Jupiter and represent the brain power, these can be given any time without reservation.
Leather products look very beautiful but they represent Ketu and are prohibited at certain occasions and places. It is not good to take a leather article at a place of worship according to ancient Indian tradition.
However, nowadays people go to temples with their leather belts and wallets. As a planet, Ketu can bring about violent changes in life and its modalities cannot be foreseen and predicted by anyone.
There is no doubt that a thoughtful choice of gifts in everyday life or some special occasions can be safely based on a study of planets and their influences. To some the process might seem complicated and time consuming, it is not so if a little attention is paid to this aspect. All planets have same basic tendencies. By knowing about them we can make our choice with confidence. Gifts representing the Sun, the Moon, Jupiter and Venus are largely safe and standard. Their influence in the form of gifts is unquestionably benefic.
Since a gift is a symbol of good-will, reverence and love, it must be chosen with consideration. For this one need not be an expert astrologer. It calls for a little awareness only. In case, if some has to give a very costly and special gift to his or her loved one, in that case, one can even consult a competent astrologer about that. *****

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Epistemology of Astrological Remedies- R.K. Shridhar

Posted by Vedic Astrology on October 22, 2012

Remedial measures play a significant role in astrology. All over the world measures to rectify the influence of malefic planets in the horoscope of a native are popular with the astrologers. From time immemorial remedial measures have been in currency in India among astrologers and practitioner. In ancient Indian literature there are countless references to such measures being in vogue.

There were yagyas of several kinds and a number of other rituals for appeasing different gods for there blessings. There were the measures for getting an issue, astrological advice for having blessings for prosperity and for a victory in a war. Also the remedies were sought for getting over some incurable disease and so on and so forth. Great kings and rich people visited the ashrams of sages and spiritual luminaries for having there ambitions and desires fulfilled through occult practices.
The persons who identified the flaws in a native’s chart were the men of great intellectual perspicacity. By their vast astrological data they could drive a subject through all hurdles and tensions. Thus, curative and remedial measures were very efficacious and, sometimes, brought about instant results. The gurus and pundits were true guides. In every kingdom, big or small, the post of Raj Guru was the most important one. A person holding it had a great say in almost all the activities of the State, mundane or transcendental. Even the king did not overlook the advice of his Raj Guru and revered him unreservedly.
Not only this but also the practitioner of the other disciplines did use the knowledge of astrology to make everything foolproof. The medical practitioner – vaidya – would use his knowledge of astrology while prescribing some medicine to an ailing person. The patient’s time of visit was minutely observed before any physical examination. Graha Vichar – a study of planetary positions – played a great role in deciding the nature and the probable course of the disease. Even the medical posology was more than often governed by recondite considerations. Gems were recommended to be put on by the subject and also were used in Ayurvedic medicines: praval bhasm, mukta pishti and many other herbal and miscellaneous ingredients. Thus, the deficiency of calcium can be effectively set right with the help of mukta pishti and by putting on pearl in a silver ring on Monday.
Remedies are countless through astrological observations. The purpose of this article is to make others aware of the infinite possibilities of the remedial measures in all astrological studies. Why offering solutions to a native on the basis of his chart, an astrologer should be competently aware of the suggested remedies and there effectiveness, while keeping the dimensions of the problem on mind all the time. It will enable him to have a clear-cut view of all aspects of the required elements. The finality of the interpretation now depends on the accuracy of the analytical process and thereby the thoroughness of the inference.

Before arriving at any conclusion, an astrologer should pay a close attention to all malefic and benefic planets into consideration first. After that he must also think over what remedial measures will be most effective for the native astrologically. Once his doubts are cleared up, he will then be standing on a firm ground.
Viewed from this angle, astrological remedial measures take on tremendous significance. There can be two distinctive approaches. The one is to give more power to a planet that is in state of weakness. Another approach is to strengthen a planet that is already strong. Once, an astrologer has decided his approach, he can get along with his suggestions about the rectification of the planetary flaw through a combative and efficacious remedial measure: a measure that can nullify all effects of any inimical planet in the horoscope of the native.
More than often it has been noted by astute astrologers that the remedial measures suggested do not bring about the desired change because there is a failure in measuring their true effectiveness. It has been observed by a number of astrologers that some planets do not give their best results or expressions against some other planets that have a greater power in shaping the human lot.
It is suggested that study of remedial measures calls for further research from the avid students and scholars of astrology.

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Raksha Bandhan: A Bond Inviolable — R K Shridhar

Posted by Vedic Astrology on July 19, 2012

Raksha Bandhan is not just a festival in India. It’s an emotional experience. It is not just tying of a thread round the wrist of a brother by a sister. It symbolizes a never ending link. It is a symbol of a sacrosanct relationship, above any doubts and is absolutely transparent. It has many dimensions. It enriches a person’s life in many ways and also it motivates a brother to assure his sister of protection from his side.

All over India this festival is celebrated with utmost enthusiasm. Raksha Bandhan takes place on Poornima (full Moon day) of Shravan month. Our shashtras categorically mention that this festival doesn’t take place in the Bhadra of Shravani and Falguni nakshatras. This year Raksha Bandhan will take place on 2nd August. The auspicious time for tying Rakhee will be between The Sun Rise and 08.57 hrs only.
There are several mythological sagas concerning the festival of Raksha Bandhan. One of them is when the demon king, Bali, had with his religious rituals threatened the throne of Indra, the latter then sought the help of Lord Vishnu. He then came to Bali in Vaman Avtaar (Dwarf Manifestation) and asked for a donation of three steps of land. Although king Bali had made out the plan of gods, he abided by his word. Then, in one step, Vishnu covered heaven and in his second step, he took in the whole earth. Then, for the third one, Bali offered his head. By the touch of lord’s holy foot, king Bali attained salvation and reached heaven. Immensely pleased with Bali’s commitment, lord asked the demon king to get some boon in return for fulfillment of his promise. Bali asked Vishnu to remain before him day and night. Lord Vishnu became the doorkeeper of the king. Then, on advice of Narad, Lakshmi tied a thread on the wrist of king Bali and got Vishnu back to her. Vishnu’s release took place on poornima of Shravan month. The festival of Rakhee is, therefore, observed from that day.
Once, Draupadi tied a strip of her saree on the finger of Lord Krishna, when it was hurt while he was killing Shishupal. While Draupadi was being stripped before others, Lord kept her honour intact by throwing a never ending cloth around her. The incident is set to have happen at poornima of Shravan month.
Even the Moughal King, Humayun, showed his deference towards the significance of Rakhee. He didn’t take measures against the attack of Shershah Soori and went away to save and help the widow Rajpoot queen of Chittaur, Karnavati, who had sent a rakhee to Humayun.
This festival is celebrated in different ways and in different names in different states of India. In Uttarakhand it is called Shravani. In Orrisa it is called Avani Avittam. Some others call it Hariyali Teez.
All over the country, Raksha Bandhan is celebrated with some variation in ritualistic performance. Notwithstanding the regional differences and some local traditions, the similarity lies in the fact in all these varieties, the festivities involved express intense joy, exalted mood and emotional vivacity.
Rakhee- thread- is not tied only by a sister on the wrist of a brother. A family purohit (Brahmin) ties it round his client’s wrist for his raksha (protection) too. At times it is also tied on the wrists of parents and elders. At some another level of interpretations, this tying of Rakhee round someone’s wrist is an avowal of one’s commitment to and identification with someone else.
The elaborate preparation of eatables and other formalities are much in practice in this festival all over India. The eatables like Kheer, Pooris, Ghevar, Halwa, Kachauri and a number of other scrumptious regional delicacies can be a source of any gourmet’s delight.
In some regions of this country, at the time of this festival, Brahmins, even change there Janeu (the sacred thread) as it is considered to be the best day for this ritual.
While a sister is tying a Rakhee on her brother’s wrist, she puts on his forehead a tilak (mark) with paste made of turmeric, saffron and sticks some grains of rice on the mark.
In the present day context too, this festival holds lots of significance. At a time when the human beings seem to have been losing fast their emotional attachment with their loved ones and getting dehydrated of their tender feelings, this festival brings about a sure transformation of one’s self.
Mainly, this festival represents a bond- link – a commitment…What could be greater and more beautiful than a relationship between a brother and a sister!
Long back some not very educated females of the Uttarakhand tied rakhees round the tree trunks and didn’t allow the officials to fell the trees. Thus the commitment of these sisters to their brother trees came to be known as ‘Chipko Andolan’ in that region.
The glory of this festival lies in its comprehensive nature. Its facets are many and these project several aspects at an interpretative level.
Thus, the very word Raksha Bandhan stands for bond-commitment to protect someone. It means something ineluctable under any circumstances.
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Guru Purnima: A Mystic Experience (3rd July, 2012) – By R.K. Shridhar

Posted by Vedic Astrology on July 16, 2012

The status of Guru is the highest according to the Indian cultural and spiritual heritage. He is the one who leads a pupil from the darkness of nescience to the radiance of wisdom. He clears up all doubts of a true disciple. The privileged one is the one who has surrendered himself wholly to his Guru.
A disciple’s unshakable faith in his Guru leads him to illimitable heights of spirituality. A Guru is a protector too. He is an impregnable shield against the vile and violent attacks of a selfish and callous world. Through his Guru only a disciple learns the true meaning of life. Also he imbibes those ethical and spiritual values of humanity that help him rise above petty ambitions and meaningless competition. Any association with a true guru brings about a spiritual purification in an ardent practitioner. A Guru emancipates his disciple from the clutches of envy and umbrage.
Guru Purnima or Vyas Purnima is celebrated all over India. Ved Vyasa, the immortal one, came down to the earth – the mortal world – for tutoring the mankind. He compiled the four Vedas, 18 Puranas, Upapuranas, Vysa Samhita and one of the greatest epics, the Mahabharat. All these tomes were meant to lead the human beings through the confusing, labyrinthine paths of life. In fact, the quintessence of this great festival lies in the mystic experience that a true devotee of a Guru can have on this Day.
In Indian tradition of learning Ved Vyas is recognize as Adi Guru…He is, undoubtedly a Guru of gurus. Any astrologer who wants to have the highest intuitive power must give the supreme position to his Guru then and only then can he look into the mystic operations of the stars. Only that would make him the best practitioner of the predictive astrology. Guru Purnima which falls now on the 3rd July 2012 can be the best date for beginning any spiritual practice.
In the presentday world the Guru – shishya parampara (teacher-taught tradition) has lost its significance to a great extent. And, yet, the people at large in this country look up to a Guru.
The quest for a Guru cannot be overlooked. Asexander the great, Hellen Keller, Shivaji and Swami Vivekanand and many other luminaries in different fields of activities, could attain the rare position because of the enlightening guidance of their respective Gurus.
At a symbolic level of interpretation too, Guru Purnima holds a significant place. The word Purnima connotes perfect brightness and the light issuing from the moon then has the power to expand one’s intellectual and spiritual horizon on the one hand and is capable of bestowing on one a soothing tranquility on the other. This is a day of inner refinement. The amorphous blessings of a kind Guru can cause a qualitative change in his disciple and dispel his doubts forever.
The tradition of paying respect to a guru is a universal practice. However, in India and in some oriental countries, it is present in a form of devotion and absolute surrender.
The role of Guru is a difficult one. Only the one who has risen above his own desires and can look at events, people and situations objectively and dispassionately can be a true and dependable Guru.
This year Guru Purnima is falling on 3rd July. While celebrating it, we must take up vows for a righteous living. Guru Purnima must be a new beginning. We must now give new dimensions to the word Guru. Expand it as much as possible. The aim should be the betterment of the world. In the book I and My Father Are One, the writer has very thoughtfully observed, ‘The need of the hour is a universal Guru, who would be a Grand Master, both, in Science and Spirituality. This Guru will realign the Yin and the Yang of the ailing humanity. All religions have to seek a common plat form and give space to science in their life to better their suffering lot. This Guru need not be in a body. It could be a set of precepts and principles universally applicable. This Guru when accepted by one and all will ultimately give individual space to everyone to practise spirituality. Once you are truly spiritual you cannot even hurt a fly…’
Mankind today needs a Guru with a new and universal vision. It needs the one who is willing to devote himself wholly for a unification of the world. We need now a Global Philosopher. Only such a Guru can effectively nullify the rapidly growing fissiparous elements in the human society nowadays.
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मकर संक्रांति : करें सूर्य उपासना

Posted by Vedic Astrology on January 13, 2011

हिंदू पौराणिक शास्त्रों में ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के बीच संबंधों का व्यापक उल्लेख मिलता है। ग्रहों के आपसी संबंध का असर इंसान पर भी स्पष्ट रूप से होता है। इसीलिए हमारे मनीषियों ने व्यापक जनहित में त्योहार और पर्व विशेष पर पूजा और दान आदि परंपराओं की व्यवस्था की जिससे आमजन ग्रहों के गोचर में होने वाले परिवर्तनों के कारण उससे होने वाले संभावित नुकसान से बच सकें।
मकर संक्रांति के अवसर पर किए जाने वाले दान-पुण्य की व्यवस्था के पीछे भी यही दूरदृष्टि है। पौराणिक कथाओं में सूर्य को जगत की आत्मा बताया गया है। सूर्य के बगैर इस जगत में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। पृथ्वीवासियों के लिए सूर्य ही एकमात्र प्रत्यक्ष देव हैं। इसीलिए सभी धर्मो के अनुयायी किसी न किसी रूप में सूर्य की पूजा करते हैं।

स्कंदपुराण के काशी खंड में वर्णित प्रसंग के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा सूर्य की गर्मी को सहन नहीं कर पा रही थीं। उन्होंने इससे बचने के लिए अपने तप से अपने ही रूप-रंग और शक्ल की स्त्री छाया बनाई और उससे प्रार्थना की कि वह सूर्य के साथ रहे और सूर्य को यह भेद न दे कि संज्ञा सूर्य से दूर है और छाया संज्ञा की हमशक्ल है। छाया से सूर्य को दो पुत्र और एक पुत्री प्राप्त हुए। उनमें से एक शनि हैं।

शनि महात्म्य के अनुसार शनि का जन्म होते ही उनकी दृष्टि पिता सूर्य पर पड़ी। परिणामस्वरूप तत्काल ही सूर्य कुष्ठ रोग से पीड़ित हो गए। उनका सारथी अरुण पंगु हुआ और उनके घोड़े अंधे हो गए। इस प्रकार सूर्य ने महसूस किया कि शनि की दृष्टि महाविनाशकारी है। सूर्य ने अपने गुणों और अपने पुत्र शनि के गुणों की तुलना की और महसूस किया कि कुछ गड़बड़ है। सूर्य ने छाया को प्रताड़ित किया।
यह शनि को सहन नहीं हुआ और शनि सूर्य के परम शत्रु हो गए। यद्यपि सूर्य शनि से बैर भाव नहीं रखते हैं। पिता सूर्य से बदला लेने के लिए शनि ने शिवजी को अपना गुरु बनाया और उनकी तपस्या कर किसी का भी अनिष्ट करने की शक्ति का वरदान प्राप्त कर लिया। भगवान शिव ने शनि की भक्ति से प्रसन्न होकर शनि को न्यायाधीश बनाया और वरदान दिया कि शनि व्यक्ति के कर्मो के अनुसार अच्छे कर्मो के लिए व्यक्ति की उन्नति करेंगे और बुरे कर्मो के लिए उसे प्रताड़ित भी कराएंगे।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य वर्षर्पयत मेष से लेकर मीन तक एक-एक माह की अवधि के लिए सभी राशियों में भ्रमण करते हैं। १४ जनवरी को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर और कुंभ राशियां सूर्य के पुत्र शनि की राशियां हैं और शनि सूर्य से बैर रखता है।
दुश्मन की राशि मकर में सूर्य के प्रवेश करने और अगले दो महीनों के लिए शनि की मकर और कुंभ राशियों में सूर्य के रहने से और पिता-पुत्र में बैर भाव स्थिति से पृथ्वीवासियों पर किसी प्रकार का कुप्रभाव न पड़े, इसलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने तीर्थ स्नान, दान और धार्मिक कर्मकांड के उपाय सुझाए हैं। मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ से बने लड्डुओं का उपयोग करने और उसके दान के पीछे भी यही मंशा है।

ज्योतिष के अनुसार तेल शनि का और गुड़ सूर्य का खाद्य पदार्थ है। तिल तेल की जननी है, यही कारण है कि शनि और सूर्य को प्रसन्न करने के लिए इस दिन लोग तिल-गुड़ के व्यंजनों का सेवन करते हैं। तीर्थो पर स्नान और दान-पुण्य की व्यवस्था भी इसी उद्देश्य से रखी गई है कि पिता-पुत्र के बैर भाव से इस जगत के निवासियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े और भगवान उसे किसी भी बुरी स्थिति से बचाएं।

सूर्य राज, सम्मान और पिता का कारक ग्रह हैं और शनि न्याय और प्रजा का कारक है। जन्म पत्रिका में सूर्य शनि की युति अथवा दृष्टि संबंध से ही पितृ दोष उत्पन्न होता है। लकवा और सिरदर्द जैसे रोगों से पीड़ित लोगों के लिए इस दिन दान-पुण्य वरदान माना गया है। ऋषि मुनियों ने अपने अनुभव के आधार पर यह व्यवस्थाएं आमजन के लिए प्रतिपादित की हैं। उन्होंने ग्रहों के प्रकोप और उनकी शांति के उपाय भी बताए हैं।
मकर संक्रांति के दिन से लोग मलमास के बंधन से मुक्त हो जाएंगे। विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यो के लिए लोगों को इस दिन का बेताबी से इंतजार रहता है। ज्योतिष शास्त्र में मलमास के दौरान शुभ कार्य अनिष्ट कारक माने जाते हैं। मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आ जाते हैं।

भारत में मकर संक्रान्ति के विविध रूप


संपूर्ण भारत में मकर संक्रांति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है।
हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जलाता है। उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से ‘दान का पर्व’ है समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी सेवन एवं खिचड़ी दान का अत्यधिक महत्व होता है। इलाहाबाद में गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है। महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल, नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। बंगाल में गंगासागर में प्रतिवर्ष विशाल मेला लगता है। कहा जाता है-`सारे तीरथ बार बार लेकिन गंगा सागर एक बार। तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। असम में मकर संक्रांति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहू के नाम से मनाते हैं। राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएं अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। अत: मकर संक्रांति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।

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